सोमवार 26 अक्टूबर 2026 - 22:37
विलायत की रक्षा से लेकर नई पीढ़ी की तरबीयत तक, हज़रत फ़ातिमा ज़हरा की सीरत आज भी मार्गदर्शन का प्रकाशस्तंभ है : आगा सय्यद मुहम्मद हादी मूसवी

अय्याम-ए-फ़ातिमिया और हज़रत फ़ातेमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा की शहादत के अवसर पर आयतुल्लाह सय्यद यूसुफ मेमोरियल ट्रस्ट के अध्यक्ष हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन आगा सय्यद मुहम्मद हादी मूसवी ने बडगाम स्थित मदरसतुल कुरआन दारुल अली, मीरगुंड तथा मस्जिद इमाम ज़माना, मुख्य बाज़ार बडगाम में आयोजित मजलिसों को संबोधित किया। इस दौरान ज़ाकिरों और अज़ादारों ने मर्सिया पढ़कर पैगंबर-ए-इस्लाम की सुपुत्री हज़रत फ़ातिमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा को श्रद्धांजलि अर्पित की।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, अय्याम-ए-फ़ातिमिया और हज़रत फ़ातेमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा की शहादत के अवसर पर आयतुल्लाह सय्यद यूसुफ मेमोरियल ट्रस्ट के अध्यक्ष हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन आगा सय्यद मुहम्मद हादी मूसवी सफवी ने बडगाम स्थित मदरसतुल कुरआन दारुल अली, मीरगुंड तथा मस्जिद इमाम ज़माना, मुख्य बाज़ार बडगाम में आयोजित मजलिसों को संबोधित किया। इस दौरान ज़ाकिरों और अज़ादारों ने मर्सिया पढ़कर पैगंबर-ए-इस्लाम की सुपुत्री हज़रत फ़ातिमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा को श्रद्धांजलि अर्पित की।

हज़रत फ़ातिमा ज़हरा सभी महिलाओं के लिए आदर्श

आगा सय्यद मुहम्मद हादी मूसवी सफवी ने हज़रत फ़ातेमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा की सीरत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका जीवन और चरित्र सभी महिलाओं, माताओं और परिवारों के लिए एक बेहतरीन आदर्श है। उन्होंने कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम सल्लल्लाहु अलैहि व आलेही वसल्लम की हदीसें हज़रत ज़हरा के महान आध्यात्मिक स्थान, प्रतिष्ठा और श्रेष्ठता को स्पष्ट करती हैं। उनका संपूर्ण जीवन धार्मिक मूल्यों, इबादत, संतान की तरबीयत, प्रेम, वफादारी और पारिवारिक जीवन के उच्च आदर्शों का व्यावहारिक उदाहरण है।

उन्होंने कहा कि हज़रत फ़ातेमा ज़हरा को ‘उम्मे अबीहा’ की उपाधि उनके स्नेह, करुणा और पैगंबर-ए-इस्लाम के प्रति गहरे प्रेम और लगाव को दर्शाती है। अरब के अज्ञानता के दौर में महिलाओं को प्राप्त निम्न सामाजिक स्थान के विपरीत, पैगंबर-ए-इस्लाम ने अपनी सुपुत्री के साथ असाधारण सम्मान का व्यवहार करके महिलाओं की गरिमा और प्रतिष्ठा को उजागर किया। उन्होंने कहा कि हज़रत ज़हरा की सीरत किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं, बल्कि सभी महिलाओं और पूरी मानवता के लिए एक व्यापक आदर्श है।

विलायत की रक्षा : हज़रत ज़हरा की महान भूमिका

आयतुल्लाह सय्यद यूसुफ मेमोरियल ट्रस्ट के अध्यक्ष ने कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम के निधन के बाद हज़रत फ़ातेमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा ने इमामत और विलायत की रक्षा के लिए अपना पक्ष स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया। उनका खुतबा-ए-फ़दक केवल व्यक्तिगत अधिकार की मांग नहीं था, बल्कि उसमें कुरआन, पैगंबर की सुन्नत, सत्य और असत्य की पहचान, इस्लामी मूल्यों की रक्षा तथा उम्मत के सुधार का गहरा संदेश भी निहित था।

उन्होंने कहा कि हज़रत ज़हरा ने अपने आचरण और भाषणों के माध्यम से उम्मत को यह संदेश दिया कि पैगंबर-ए-इस्लाम की शिक्षाओं और अहलेबैत के मार्गदर्शन से जुड़ाव ही इस्लामी समाज को सही दिशा प्रदान कर सकता है। उन्होंने जोर दिया कि हज़रत ज़हरा की सीरत से धार्मिक ज्ञान, दूरदर्शिता, सत्य की पहचान और सत्य का समर्थन करने की शिक्षा प्राप्त करनी चाहिए।

आगा सय्यद मुहम्मद हादी मूसवी ने हज़रत अब्बास अलैहिस्सलाम की वफादारी, बहादुरी और इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के प्रति अटूट निष्ठा का उदाहरण देते हुए कहा कि कर्बला की घटना में जब हज़रत अब्बास को अमान की पेशकश की गई, तो उन्होंने उसे ठुकरा दिया और इमाम हुसैन का साथ नहीं छोड़ा। वह अंतिम सांस तक अपने समय के इमाम की सहायता के लिए दृढ़ रहे।

उन्होंने कहा कि हज़रत अब्बास के महान व्यक्तित्व के निर्माण में उनकी माता की तरबीयत की महत्वपूर्ण भूमिका थी। हज़रत फ़ातिमा उम्मुल बनीन सलामुल्लाह अलैहा ने अपनी संतानों का इस तरह पालन-पोषण किया कि वे धर्म, इमामत और अपने समय के इमाम की सहायता के लिए हर प्रकार का बलिदान देने को तैयार रहे।

उन्होंने कहा कि उमर सअद, शिम्र ज़ुल-जौशन और अन्य अत्याचार करने वाले लोग भी किसी मां की संतान थे, लेकिन गलत तरबीयत ने उन्हें अत्याचार के रास्ते पर डाल दिया। इसके विपरीत, अच्छी तरबीयत का प्रभाव यह था कि एक तेरह वर्षीय बालक ने भी मौत को शहद से अधिक मीठा बताया। उन्होंने कहा कि हज़रत फ़ातिमा ज़हरा की सीरत माताओं और महिलाओं को यह शिक्षा देती है कि वे अपनी संतानों में धर्म, नैतिकता, साहस, वफादारी और विलायत के प्रति जागरूकता पैदा करें।

माता-पिता की भूमिका और पारिवारिक वातावरण

आगा सय्यद मुहम्मद हादी मूसवी ने बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में घर और माता-पिता की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अभिभावकों को ऐसा पारिवारिक वातावरण तैयार करना चाहिए, जहां बच्चों में शिष्टाचार, सम्मान, धार्मिक चेतना, प्रेम और माता-पिता के प्रति आदर की भावना विकसित हो।

उन्होंने कहा कि पति-पत्नी के बीच मतभेद, एक-दूसरे के प्रति सम्मान में कमी और घरेलू तनाव बच्चों के व्यक्तित्व तथा उनकी तरबीयत पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं।

उन्होंने माता-पिता से अपील की कि वे बच्चों की धार्मिक और नैतिक तरबीयत को केवल सामाजिक जिम्मेदारी न समझें, बल्कि इसे धार्मिक और नैतिक कर्तव्य मानें। इस संबंध में हज़रत फ़ातेमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा और अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली अलैहिस्सलाम की सीरत को आदर्श बनाया जाना चाहिए। उन्होंने अपने घर को इबादत, ज्ञान, त्याग, प्रेम, विलायत और तरबीयत का केंद्र बनाया था।

कुरआन और अहलेबैत से जुड़ाव, उम्मत की एकता की गारंटी

आगा सैयद मुहम्मद हादी मूसा्वी सफवी ने कहा कि हज़रत फ़ातिमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा के संदेश का एक महत्वपूर्ण पहलू कुरआन और अहलेबैत से गहरा जुड़ाव है। कुरआन और अहलेबैत से दूरी उम्मत में बिखराव, मतभेद और कमजोरी का कारण बनती है। उन्होंने वर्तमान परिस्थितियों के संदर्भ में मुसलमानों को कुरआन और अहलेबैत से जुड़े रहने, धार्मिक जागरूकता बढ़ाने तथा आपसी एकता मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि मुसलमानों को मतभेदों से ऊपर उठकर भाईचारे और एकता को बढ़ावा देना चाहिए तथा अपनी धार्मिक और सामाजिक जिम्मेदारियों को समझते हुए समाज के सुधार में योगदान देना चाहिए। उनके अनुसार, हज़रत ज़हरा को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि उनकी सीरत और संदेश को केवल मजलिसों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उसे व्यावहारिक जीवन का हिस्सा बनाया जाए।

आयतुल्लाह सय्यद यूसुफ मेमोरियल ट्रस्ट के अध्यक्ष ने वर्तमान परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए मुसलमानों की उदासीनता और आपसी बिखराव पर चिंता जताई। उन्होंने उम्मत की एकता, धार्मिक चेतना, दूरदर्शिता तथा सत्य और वास्तविकता की पहचान को समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता बताया।

मजलिस के समापन पर आगा सैयद मुहम्मद हादी मूसा्वी सफवी ने हज़रत फ़ातेमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा के जीवन के दुखद प्रसंगों का वर्णन किया। इसके बाद उपस्थित अज़ादारों ने शोक, मातम और कश्मीरी मर्सियाख्वानी के माध्यम से पैगंबर-ए-इस्लाम की सुपुत्री के प्रति अपनी श्रद्धा और प्रेम व्यक्त किया।

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